
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
शारदीय नवरात्रि की द्वितीया पर माँ ब्रह्मचारिणी को नमन। तप, संयम और ज्ञान का यह स्वरूप साधक को आत्मबल, आत्मसंयम और सत्य मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से सभी के जीवन में दृढ़ता, भक्ति और आस्था का दीप प्रज्वलित हो। कामना है कि उनकी साधना से समस्त संसार में धर्म, सत्य और ज्ञान की गंगा प्रवाहित हो।

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